डॉन रिपोर्टर, उज्जैन।
कोरोना संकट काल शायद कुछ निजी अस्पतालों के लिए खुशियों का समय भी लाया है। इस संकट काल में भी इन्हें मरीजों और उनके साथ आए परिजनों से कोई हमदर्दी नहीं बल्कि डर दिखाकर ये खुली लूट में मस्त है।
फ्रीगंज स्थित भार्गव हार्ट हॉस्पिटल तो शायद ऐसा है कि मानो यहां के डॉक्टर अमित भार्गव ने खुद के साथ अपने पूरे स्टाफ को भी 'बदसलूकी' की दवा पिला दी हो। मरीजों और उनके साथ आए परिजनों से बदसलूकी कर यहां रोजाना सिर्फ मास्क के नाम पर ही एक हजार रुपए की लूट की जा रही है। प्रस्तुत है बदसलूकी की दवा पीए हुए स्टाफ और मास्क के नाम पर रोजाना एक हजार रुपए लूट की आंखों देखी और कानों सुनी एक विशेष खबर....
बदसलूकी की दवा पिये हुआ स्टाफ रोजाना ऐसे दे रहा है 1 हजार रुपए की खुली लूट को अंजाम
भार्गव हार्ट हॉस्पिटल के डॉक्टर अमित भार्गव संभवतः रोजाना 'बदसलूकी' के इंजेक्शन का ओवरडोज लेते हैं। शायद यही वजह है कि उनके इस अस्पताल की लगभग सारी यूनिट बंद हो चुकी है। अब घर में बने इस अस्पताल में उन्होंने नीचे खुद का चेम्बर बना रखा है और नीचे ही साइड में उन्होंने मेडिकल शॉप खुलवा रखी है। जहाँ चेम्बर में बैठकर वे मरीजों को देखते हैं और उन्हें मेडिकल से दवा लेने के लिए लिखते है। साधारण मरीज को भी ये 8 दिन के लिए एक हजार रुपए से कम की दवा नहीं लिखते है। एक मरीज से 8 दिन की इनकी फीस 350 रुपए है लेकिन लगभग हर मरीज से ब्लडप्रेशर व ईसीजी जांच के नाम पर खुद की फीस मिलाकर पहले 8 दिन के ये 750 रुपए लेते है। किंतु कोरोना संकट काल में इस 750 रुपए फीस के अतिरिक्त इन्होंने संभवतः अपने स्टाफ को भी 'बदसलूकी' की दवा पिला दी है। जिस पर मास्क लगाए मरीज और उनके परिजनों को भी इनका स्टाफ अस्पताल में घुसते ही जोर-जोर से चिल्लाने लगता है कि-'ए' बाहर चलिए, हटिए यहां से ये मास्क बिल्कुल नहीं चलेगा। पहले इस मेडिकल से 10 रुपए का नया मास्क खरीद कर पहने फिर अंदर आए। कुलमिलाकर स्टाफ की अभद्र भाषा और बदसलूकी से डर कर मरीज व उसके परिजनों को वो 10-10 रुपए के नए मास्क खरीदने के लिए मजबूर होना पड़ता है फिर भले ही पहले से उन्होंने 100-100 रुपए के मास्क पहन रखे हो। इस तरह अस्पताल ने कोरोना का भय दिखाकर एक दिन में 100 मास्क भी बेचे तो, वह मरीजों व उनके परिजनों से रोजाना सिर्फ मास्क के नाम पर ही एक हजार रुपए की खुली लूट कर रहा है। महीने के हिसाब से ये आंकड़ा 30 हजार रुपए का होता है।
हाथों से फीस लेने में कोई परहेज नहीं और एमआर को बिना मास्क के भी एंट्री
एकतरफ जहां सिर्फ 10 रुपए के मास्क खरीदने का दवाब बनाने के लिए स्टाफ बदसलूकी दवा पीकर अस्पताल में कोरोना डर का माहौल तैयार करता है। वहीं इस स्टाफ और डॉक्टर भार्गव को मरीज व उनके परिजनों के हाथों से फीस लेने में कोई परहेज नहीं है। वहीं मेडिकल रिप्रजेंटेटिव (एमआर) को बिना मास्क के भी अस्पताल में आने-जाने व डॉक्टर भार्गव से काउंसिल की खुली छूट है।
इनका कहना
आज का अखबार पढ़ लेवे, उसमें स्पष्ट लिखा है कि यही मास्क बेचने हैं। मरीज व उनके परिजनों ने भले ही कितने रुपये का मास्क पहन रखा हो लेकिन हमारे अस्पताल में आने के लिए हमारे मेडिकल से 10-10 रुपए के मास्क खरीदने होंगे।
- अमित भार्गव, डॉक्टर भार्गव हार्ट हॉस्पिटल ( जैसा कि उन्होंने मौखिक रूप से बताया)