भैरवगढ़ सेंट्रल जेल में क्या है 'खेल', क्या इन अधिकारी के आंवले तोड़ने के फेर में चली गई इस कैदी की जान ?

डॉन रिपोर्टर, उज्जैन।


भैरवगढ़ सेंट्रल जेल की इस्पाती चाहर दीवारों में भ्रष्टाचार और घूसखोरी का जंग फिर लगने लगा है। इस जंग के बीच अब कैदी की संदिग्ध मौत के रूप में घोर लापरवाही चहारदीवारी के भीतर से बाहर निकली है।


विचाराधीन कैदी सिराज की सोमवार सुबह जेल में संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई। अब उक्त कैदी की मौत वॉच टावर से कूदने पर या फिर गिरने से हुई है, ये अभी गंभीर जांच का विषय है लेकिन सबसे बड़ा सवाल ये है कि इतने पुख्ता इंतजामों के दावों के साथ आखिर कैदी सिराज वॉच टॉवर तक पहुंचा कैसे ?


इस मामले में विश्वसनीय सूत्र ये बताते है कि जेल में एक अधिकारी हैं, जो लंबे समय से यहां टिके हुए हैं, जो रिश्वत लेने बहुत ही 'बढ़िया' अधिकारी हैं। रोजाना यदि ये ईमानदारी से घूसखोरी न कर लें तो इन्हें 'संतोष' ही नहीं मिलता। कैदी सिराज की जो जान गई है ? वह इनके लिए ही पेड़ से आंवले लाने के फेर में गई है। वह कैसे गई ? इसके लिए पूरी खबर पढ़ना बहुत जरूरी है। 


पहले जेल को भीतर से समझें फिर कैदी की संदिग्ध मौत को जाने


भैरवगढ़ जेल में अ, ब व स तीन खंड हैं। अ खंड अंग्रेजों के जमाने की बनी जेल है। इस जेल में ऊपर छत है। यहां प्रहरी भी पहरा देते हैं और बिना इंट्री के वे भी छत पर नहीं जा सकते हैं। छत पर जाने के लिए एक ही रास्ता है, जो लाल गेट यानी मुख्य द्वार से ऊपर के लिए जाता है। सुरक्षा की दृष्टि से यहां लोहे के अलग-अलग दो गेट लगे हुए हैं। इन गेटों की चाबी हेडसाहब के पास होती है। मसलन जिस प्रहरी को पहरा देने के लिए या फिर छत की साफ सफाई के लिए सजायाफ्ता कैदी को साथ लेकर ऊपर जाना होता है। तब भी उसकी एंट्री रजिस्टर में कर हेडसाहब से ताला खुलवाकर छत पर जाना होता है। यही ऊपर से नीचे आने की प्रक्रिया है। ब व स खंड नई जेल है। ब खंड में जाने के लिए सात नंबर वार्ड से होकर जाना होता है लेकिन बिना किसी की अनुमति व चक्कर अधिकारी की पर्ची दिखाए बगैर किसी की भी एंट्री ब खंड में नहीं हो सकती। स खंड में कारखाना है। यहां सिर्फ सजायाफ्ता कैदी ही काम करते हैं। यहां जाने पर विचारधीन व नई आमद कैदी की एंट्री प्रतिबंध है। यहां परिसर के चारों ओर छत नहीं बल्कि दीवारें हैं। ब खंड में वॉच टावर लगा हुआ है। यहीं आंवले के पेड़ भी है। विश्वसनीय सूत्रों के मुताबिक घटना से पहले रिश्वत लेने में 'बढ़िया' व घूसखोरी में 'संतोष' रखने वाले अधिकारी ने अपने खास सुंदर (ललित) प्रहरी को मौखिक आदेश दिया था कि घर पर मुरब्बा बनना है इसके लिए पेड़ से ताजे आंवले तुड़वा कर भेज दिए जाएं। उक्त सुंदर प्रहरी ने ये आदेश अन्य प्रहरी को फारवर्ड कर दिया। जिस पर वॉच टॉवर के रास्ते से ऊपर जाकर पेड़ से आंवले तोड़ने के लिए गेट खोला गया और प्रहरी तीन-चार कैदियों को लेकर ऊपर गया। सूत्र बताते है कि इस रास्ते को बंद नहीं किया गया। अब कैदी ने ऊपर जाकर कूदकर आत्महत्या की या फिर वह किसी लापरवाही का शिकार हुआ। ये अभी गंभीर जांच का विषय है।


इनका कहना


पेड़ से आंवले तुड़वाने की जानकारी बेबुनियाद है। पूरी घटना कैमरे में कैद हो गई है। जिसे मृतक कैदी के परिजनों ने भी देख लिया है। मामले में न्यायिक मजिस्ट्रेट जांच जारी है।


- संतोष लढ़िया, जेलर भैरवगढ़ सेंट्रल जेल


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