शायद देश का इकलौता विभाग, जहां गलती किसी की भी लेकिन हर हाल में सस्पेंड होगा कर्मचारी ही, अब एसपी बंगले पर काम से इंकार करने पर 2 कांस्टेबल निलंबित

डॉन रिपोर्टर, उज्जैन।


हाल ही में पंजाब व हरियाणा हाईकोर्ट ने पुलिस की सेहत पर सवाल उठाया था। स्टेटस ऑफ पुलिसिंग इंडिया 2019 की रिपोर्ट पर गौर करें तो देश में 73 फीसदी पुलिसकर्मी ऐसे हैं, जो किसी न किसी प्रकार से मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य की समस्याओं से जूझ रहे हैं। बावजूद शायद ये ही देश का इकलौता ऐसा विभाग होगा, जहां गलती किसी की भी हो लेकिन हर हाल में सस्पेंड कर्मचारी (पुलिसकर्मी) को तो होना ही है। 


अब उज्जैन संभाग के मंदसौर जिले के दो कांस्टेबलों को इसलिए सस्पेंड कर दिया गया कि उन्होंने एसपी बंगले पर काम करने से इंकार कर दिया था। सस्पेंड कांस्टेबल कमलेश (बेच नंबर 863) व राजकुमार (बेच नंबर 522) हैं। इन्हें मंदसौर एसपी सिद्धार्थ चौधरी ने सस्पेंड किया है। निलंबन आदेश में स्पष्ट जिक्र है कि कांस्टेबल कमलेश व राजकुमार को पुलिस लाईन से एसपी बंगले ऑफिस में ड्यूटी लगाई गई थी। किंतु उक्त दोनों आरक्षकों द्वारा ड्यूटी पर जाने से इंकार कर दिया गया। इसलिए इनके खिलाफ रक्षित केंद्र (आरआई) मंदसौर के रोजनामचा सांहा क्रमांक 12 दिनांक 17/10/2020 पर अनुशासन हीनता की रिपोर्ट दर्ज की गई। जिस पर कर्तव्य के प्रति लापरवाही बरतने एवं अनुशासन हीनता व वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देशों की अवहेलना के लिए दोनों आरक्षकों को निलंबित किया जाता है। अब सवाल ये उठता है कि आरक्षक करे तो क्या करे ? यदि वह मौखिक आदेश के पालन में थाना क्षेत्र से जुएं-सट्टे, अवैध शराब, मादक पदार्थ सहित अन्य संदिग्ध गतिविधियों की मासिक बंदी की उगाई कर टीआई को सौंपे तब भी उसे सस्पेंड होना है और यदि खाकी वर्दी में अधिकारियों की निजी चाकरी से इंकार करे तो, तब भी कर्तव्य के प्रति घोर लापरवाही के हवाले से उसे सस्पेंड होना है।


100 में से 63 पुलिसकर्मी से सीनियर व्यक्तिगत काम करवाते हैं


स्टेटस ऑफ पुलिसिंग इंडिया 2019 की रिपोर्ट से पता चलता है कि मध्यप्रदेश में हर 100 में से 63 पुलिसकर्मी ऐसे हैं। जिनसे सीनियर व्यक्तिगत काम करवाते हैं। बीमार और परेशान पुलिसकर्मियों के मामले में मध्यप्रदेश देश का आठवां ऐसा प्रदेश है, जहां 67 प्रतिशत पुलिसकर्मी वर्क प्रेशर से और 59 प्रतिशत पुलिसकर्मी बीमारी से परेशान हैं।


164 साल के इतिहास में कमलनाथ ने दी थी साप्ताहिक अवकाश की सौगात


पुलिस का जन्म 1854 को अंग्रेजों के जमाने में हुआ था। तब से अब तक पुलिस पूरे 164 साल की हो चुकी है। 164 साल से ही पुलिस रोजाना 15-16 घंटे काम करती आई है। इन 164 सालों में राहत के तौर पर पुलिसकर्मियों के लिए पहला मौका तब आया था, जब मुख्यमंत्री रहते कमलनाथ ने प्रदेश के सिपाही से लेकर टीआई तक साप्ताहिक अवकाश की सौगात दी थी लेकिन उनके जाते ही वही 164 साल से चली आ रही व्यवस्था फिर लागू हो गई।


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