डॉन रिपोर्टर, उज्जैन।
उज्जैन एसपी का पदभार ग्रहण करने से पहले प्रमोटी आईपीएस मनोजकुमार सिंह ने सबसे पहले महाकाल के दरबार में जाकर सिर के बल अपनी नाक रगड़ी थी लेकिन लगता है कि फिर भी इनकी कार्यशैली से नाखुश होकर भूतभावन बाबा महाकाल ने इन्हें माफ नहीं किया। अब जहरीली शराब से हुई 14 मौतों के मामले में जिम्मेदार मानते हुए मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने इन्हें उज्जैन एसपी के पद से हटाया है।
ये दूसरा मौका है जब प्रमोटी आईपीएस सिंह मुख्यमंत्री चौहान के चंगुल में उलझे हैं। इसके पहले 2006 में उज्जैन में बतौर माधवनगर सीएसपी रहते सिंह को सीएम चौहान के निर्देश पर सस्पेंड किया गया था। तब इनके खिलाफ प्रोफेसर सभरवाल हत्याकांड में लॉ-एन-ऑर्डर ड्यूटी के दौरान घोर लापरवाही के आरोप लगे थे। जिससे नाराज होकर सीएम चौहान ने इन्हें तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया था। 14 साल बाद यानी 2020 अप्रैल-मई में इनकी बतौर एसपी उज्जैन में वापसी हुई थी। जिस पर पांच-छह माह पदस्थ रहकर ये उज्जैन जिले को ठीक से संभाल नहीं सके। इस दौरान इनके कार्यकाल में विवादित टिप्पणी करने पर एक संगठन ने इनके खिलाफ मोर्चा खोल लिया। जिसपर वरिष्ठ अधिकारियों के हस्तक्षेप से मामले को शांत करवाया गया। वहीं कानपुर के गैंगस्टर विकास दुबे की महाकाल मंदिर से गिरफ्तारी में भी इनकी कार्यशैली लापरवाही पूर्वक पाई गई।
वहीं अब जहरीली शराब से हुई 14 मौतों के मामले में जिम्मेदार मानते हुए सीएम चौहान ने इन्हें उज्जैन एसपी से हटाने के निर्देश जारी किए। इसतरह माना जा सकता है कि बाबा महाकाल ने इन्हें दूसरी बार भी दंड देकर उज्जैन से हटाया है। 14 मौतों के मामले में सीएम चौहान में महाकाल सीएसपी डॉ.रजनीश कश्यप को निलंबित किए जाने के निर्देश दिए हैं।